भारतीय संविधान का समृद्ध इतिहास है, जो स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक घटनाओं से प्रभावित है। समकालीन भारतीय संविधान को आकार देने वाले विचारों की जड़ें लगभग 1895 से ही विकसित होने लगी थीं। संविधान बनाने के शुरुआती प्रयासों में 1895 का ‘स्वराज विधेयक’, 1928 की ‘नेहरू रिपोर्ट’, 1931 का ‘कराची संकल्प’, 1944 में एम.एन. रॉय का ‘स्वतंत्र भारत का संविधान’ और बी.आर. अंबेडकर की ‘राज्यों और अल्पसंख्यकों’ की 1945 रिपोर्ट शामिल हैं। यदि वर्तमान संविधान में मौलिक अधिकार अध्याय की तुलना नेहरू रिपोर्ट या कराची प्रस्ताव से की जाए - तो काफी समानताएं मिलेंगी। 

हमारे संविधान के निर्माता कौन थे? 

1946 की कैबिनेट मिशन योजना के तहत, संविधान सभा को एक प्रतिनिधि निकाय के रूप में स्थापित किया गया था। 292 सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से प्रांतीय विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्यों ने चुने थे, ये प्रांतीय सदस्य खुद 28.5% वयस्क आबादी के सीमित मताधिकार पर चुने गए थे। इसके अलावा रियासतों ने 93 सदस्यों को भी भेजा। जबकि सभा में हिंदुओं का प्रतिनिधित्व प्रमुख था, अन्य प्रमुख धार्मिक समुदायों के सदस्यों को भी संविधान सभा में जगह मिली। इनमें फ्रैंक एंथोनी, मीनू मसानी, जी. गुरमुख सिंह और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे व्यक्ति शामिल थे, जिन्होंने ईसाई, पारसी, सिख और मुसलमानों का प्रतिनिधित्व किया था। सभा में मुख्य रूप से पुरुष सदस्य थे, केवल 15 सदस्य महिलाएं थीं। कुछ प्रमुख महिला सदस्यों में हंसा मेहता, राजकुमारी अमृत कौर और दक्षिणायनी वेलायुधन शामिल थीं। 

क्या आप जानते हैं? 

भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, जिसमें लगभग 1,45,000 शब्द लिखे गए हैं। 

संसद के पुस्तकालय में हीलियम से भरे केस में संविधान की मूल पांडुलिपि मौजूद है। इसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने सुलेखित किया था और इसमें भारतीय इतिहास और संस्कृति के चित्र शामिल हैं- इस पूरी प्रक्रिया में पांच साल लगे। 

संविधान सभा ने समानांतर रूप से 15 अगस्त 1947 से 1952 में पहले चुनाव होने तक, अंतिम संसद के रूप में भी कार्य किया। 

संविधान सभा की मांग पहली बार एम. एन. रॉय ने 1930 के दशक में की थी। 

संविधान कैसे बना? 

संविधान सभा ने प्रारंभिक शोध करने और विशिष्ट विषयों पर सुझाव देने के लिए कई छोटी समितियां नियुक्त कीं। संवैधानिक सलाहकार बी.एन. राव ने अपनी रिपोर्टों को एक प्रारूप संविधान में संकलित किया, जिसे बी. आर. अम्बेडकर की अध्यक्षता में प्रारूपण समिति को प्रस्तुत किया गया था। कई बदलाव के बाद, इसने 1948 में संविधान सभा में पेश किया गया। विधानसभा ने चर्चा की और खंड दर खंड इस पर मतदान किया। इस प्रक्रिया में अन्य संशोधन करते रहे। 

इतिहास के पन्नों से 

1. “हमने इस संविधान को यथासंभव अच्छा बनाया है। अब यह हमारा कर्त्तव्य है कि हम अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर अपने ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस संविधान की व्याख्या करें, जो कि हमारा वास्तविक कार्यक्षेत्र है।” 

- बलवंत सिंह मेहता 

2. “हम (रियासतों में) खुद को भारत का हिस्सा मानते हैं, हालांकि कुछ बाहरी लोगों ने हमारे बीच दीवारें खड़ी कर दी थीं। लेकिन आज ये अप्राकृतिक दीवारें ढह रही हैं और हम आशा करते हैं कि जल्द भारत पूरी तरह से एक इकाई हो जाएगा।” 

- जय नारायण व्यास 

This article was first published in the Rajasthan Patrika e-paper

Read the following articles here: 

  1. Preamble 
  2. Fundamental Rights 
  3. Directive Principles of State Policy 
  4. Federalism 
  5. Parliamentary System 
  6. Decentralisation 
  7. Amending the Constitution